असम सरकार द्वारा जब्त किए गए लाल चंदन के निपटान और नीलामी में कथित “बड़े पैमाने पर अनियमितताओं” के दावों को खुद वन विभाग की एक रिपोर्ट ने कटघरे में खड़ा कर दिया है, जिसमें सामने आया है कि जब एम.के. यादव प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (PCCF) और HoFF थे, तब पूरी नीलामी प्रक्रिया सरकारी मंजूरियों और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत ही की गई थी। विडंबना यह है कि जिस एम.के. यादव के नेतृत्व में यह प्रक्रिया शुरू और अनुमोदित हुई थी, वे अब उसी विभाग में विशेष मुख्य सचिव के पद पर हैं जिसने इस नीलामी रिकॉर्ड की नए सिरे से जांच और लाल चंदन के परिवहन पर रोक के आदेश दिए हैं। असम पुलिस के गोपनीय इनपुट और एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर 13 अगस्त को जारी आदेश में स्टॉक से भारी मात्रा में लाल चंदन के गायब होने का अंदेशा जताया गया था और मूल्यांकन से जुड़े दस्तावेज मांगे गए थे। हालांकि, वर्तमान PCCF एवं HoFF संदीप कुमार द्वारा सरकार को सौंपी गई समिति की रिपोर्ट एक बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है, जो यह दर्शाती है कि निपटान, मूल्यांकन, नीलामी और परिवहन के प्रत्येक चरण में उचित सरकारी मंजूरी ली गई थी और कोई भी नीलामी अनधिकृत नहीं थी, क्योंकि इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने वाली समिति का गठन खुद यादव ने जनवरी 2024 में किया था।
असम सरकार के दावों के उलट वन विभाग की रिपोर्ट साफ, नीलामी प्रक्रिया में नहीं बरती गई कोई अनियमितता
