पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) में गुणवत्तापूर्ण अप्रेंटिसशिप के अवसरों को बढ़ाने और युवाओं की रोज़गार क्षमता को मज़बूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रधानमंत्री नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम (पीएम-नैप्स) के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) में अप्रेंटिसशिप को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल के विस्तार की शुरूआत की है, जिसे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ एंटरप्रेन्योरशिप (आईआईई) गुवाहाटी द्वारा लागू किया जाएगा। मई 2025 में शुरू की गई पायलट पहल की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, इस विस्तारित पहल का उद्देश्य सभी आठ पूर्वोत्तर राज्यों में अप्रेंटिसशिप की पहुंच को बढ़ाना, इंडस्ट्री और सरकारी संस्थानों की भागीदारी को बेहतर बनाना और स्किल इंडिया मिशन के तहत इस क्षेत्र के युवाओं के लिए स्थायी रोज़गार हेतु पाथवे का निर्माण करना है।मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस पहल का दायरा बढ़ाया है और 30,000 अप्रेंटिस का नया लक्ष्य तय किया है, जो पायलट चरण की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत ज़्यादा है। इनमें से, 15,000 अप्रेंटिस को पूर्वोत्तर क्षेत्र के बाहर जिसमें सरकारी विभाग और पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (पीएसयू) शामिल हैं, जिसमें अवसरों के लिए मदद दी जाएगी जबकि अन्य 15,000 अप्रेंटिस को इसी क्षेत्र में यानी उनके अपने राज्यों में काम पर रखा जाएगा।
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान, इस पहल के लिए 57.58 करोड़ रूपए की राशि तय की है। यह राशि पीएम-नैप्स के पूर्वोत्तर क्षेत्र के मुख्य कंपोनेंट से उपलब्ध कराई जाएगी।भारत सरकार के माननीय कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयन्त चौधरी ने कहा, “पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। यहाँ के युवा, टैलेंटेड और महत्वाकांक्षी आबादी देश की विकास यात्रा में योगदान देने के लिए तैयार है। इस पायलट पहल की शानदार सफलता यह दिखाती है कि सही अवसरों और सहयोग से, हमारे युवा अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर सकते हैं। पीएम-नैप्स के तहत इस पहल को आगे बढ़ाकर, हम गुणवत्तापूर्ण अप्रेंटिसशिप अवसरों तक पहुंच बढ़ा रहे हैं, लोकल इकोसिस्टम को मजबूत कर रहे हैं, इंडस्ट्री में भागीदारी को बढ़ावा दे रहे हैं और इस क्षेत्र के युवाओं को पूर्वोत्तर क्षेत्र और पूरे देश में काम की जगह पर कीमती अनुभव हासिल करने में सक्षम बना रहे हैं।”इस विस्तारित पहल के तहत, पीएम-नैप्स के तहत मिलने वाली सहायता के अलावा, 1,500 रुपये प्रति माह के अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन का दायरा भी बढ़ाया गया है। हालांकि, इस पायलट प्रोग्राम में मुख्य रूप से उन अप्रेंटिस को मदद मिलती थी जो अपने मूल राज्य से बाहर जाकर काम करते थे, लेकिन अब इस संशोधित पहल में पूर्वोत्तर क्षेत्र के उन अप्रेंटिस को भी शामिल किया जाएगा जो अपने ही राज्यों में काम कर रहे हैं।
वित्तीय सहायता के अलावा, यह पहल वर्कशॉप, जागरूकता अभियानों, एम्प्लॉयर एंगेजमेंट प्रोग्राम और शिक्षण संस्थानों व इंडस्ट्री के स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर अप्रेंटिसशिप इकोसिस्टम को मज़बूत करने पर ध्यान देना जारी रखेगी।इस पायलट पहल ने अपने पहले वर्ष में ही बेहतर नतीजे दिए हैं। 26,000 अप्रेंटिस के लक्ष्य के मुकाबले, इस कार्यक्रम के तहत 23,470 अप्रेंटिस को शामिल किया गया, जिससे लक्ष्य का 90 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा हासिल हुआ। इस क्षेत्र में अप्रेंटिसशिप में 51 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 15,562 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 23,470 हो गई है। इस पहल ने मोबिलिटी को भी सफलतापूर्वक बढ़ावा दिया है, जिसमें 13,673 अप्रेंटिस को अपने गृह राज्य से बाहर काम करने के अवसर मिले, जबकि 9,797 अप्रेंटिस को पूर्वोत्तर क्षेत्र में काम मिला है।इस पायलट पहल के तहत, पूर्वोत्तर क्षेत्र में अप्रेंटिसशिप में भागीदारी में उत्साहजनक वृद्धि देखी गई, जिसमें मेघालय में सबसे ज़्यादा 95 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसमें महिलाएं मुख्य लाभार्थी के तौर पर उभरी हैं और महिला अप्रेंटिसशिप में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। एम्प्लॉयर्स की भागीदारी में भी काफी बढ़ोतरी हुई है जिसमें सरकारी इस्टैब्लिशमेंट में अप्रेंटिसशिप से जुड़ाव दोगुना हो गया और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। इंडस्ट्री के लिए ज़रूरी ट्रेनिंग और रोज़गार के अवसरों तक पहुँच बढ़ाकर, यह पहल स्किल इंडिया मिशन के ज़रिए पूर्वोत्तर क्षेत्र के युवाओं को सशक्त बनाने और समावेशी विकास को तेज़ी देने के सरकार के संकल्प को फिर से दोहराती है।
