कुपोषण के जोखिम वाले भारतीय बच्चों में आहार संबंधी परामर्श के साथ ओरल न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट देने पर वृद्धि और शरीर की संरचना से जुड़े परिणामों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। यह जानकारी एबॉट द्वारा घोषित एक रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल के निष्कर्षों में सामने आई है।
छह महीने तक चले इस अध्ययन में करीब 3 से 7 वर्ष की उम्र के 223 बच्चे शामिल थे। इन बच्चों में खाने को लेकर नखरे करने की आदत थी और वे कुपोषित या कुपोषण के जोखिम में थे। सभी बच्चों को आहार संबंधी परामर्श दिया गया, जबकि इनमें से करीब आधे बच्चों को रोजाना दो बार PediaSure, एबॉट का बच्चों के लिए ओरल न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट, दिया गया।
सप्लीमेंट लेने वाले बच्चों की लंबाई में वृद्धि केवल आहार संबंधी परामर्श लेने वाले बच्चों की तुलना में लगभग 2.4 गुना अधिक रही। वहीं, उनके लीन मास (मांसपेशियों सहित शरीर का गैर-वसा वाला द्रव्यमान) में लगभग 15% अधिक वृद्धि दर्ज की गई। इन बच्चों के वजन-के-हिसाब-से-उम्र और लंबाई-के-हिसाब-से-उम्र के पर्सेंटाइल में भी चार गुना तक अधिक वृद्धि देखी गई, जो तेजी से कैच-अप ग्रोथ का संकेत है।
अध्ययन में हड्डियों के स्वास्थ्य में भी सुधार पाया गया। DXA जांच में हड्डियों के खनिज घनत्व (Bone Mineral Density) में 35% की वृद्धि दर्ज की गई और शरीर में अतिरिक्त वसा जमा होने के कोई संकेत नहीं मिले। सप्लीमेंट लेने वाले बच्चों में ऊर्जा, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन का सेवन भी अधिक रहा। इसके अलावा, मिड-अपर आर्म सर्कमफरेंस (MUAC) पर्सेंटाइल में भी सुधार देखा गया।
इन निष्कर्षों को पीयर-रिव्यू जर्नल Children और Journal of Clinical Medicine में प्रकाशित किया गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये परिणाम कम उम्र में ही कुपोषण से निपटने के महत्व को रेखांकित करते हैं। साथ ही, बच्चों की वृद्धि का आकलन केवल लंबाई और वजन के आधार पर करने के बजाय मांसपेशियों और हड्डियों के स्वास्थ्य को भी इसमें शामिल करना जरूरी है।
