द केरल स्टोरी २ केरल हाई कोर्ट ने फिल्म प्रमाणन को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं के कानूनी अधिकार की समीक्षा की

केरल उच्च न्यायालय ने फिल्म ‘द केरल स्टोरी २’ के सेंसर प्रमाणन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ‘लोकस स्टैंडाई’ यानी मामले में हस्तक्षेप करने के अधिकार पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि क्या केवल केरल का निवासी होना किसी व्यक्ति को फिल्म के प्रमाणन को चुनौती देने का कानूनी अधिकार देता है। न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि फिल्म निर्माण और उसकी स्क्रीनिंग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आती है और केवल व्यक्तिगत असहमति के आधार पर कानूनी चुनौती देना पर्याप्त नहीं हो सकता।

सुनवाई के दौरान अदालत ने सेंसर बोर्ड से यह भी पूछा कि क्या उनके पास उन टीज़र या वीडियो क्लिप पर नियंत्रण रखने का कोई कानूनी प्रावधान है, जो केवल सोशल मीडिया और यूट्यूब पर प्रसारित होते हैं और फिल्म का हिस्सा नहीं होते। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि फिल्म का शीर्षक और इसमें दिखाए गए कुछ दृश्य केरल की सामाजिक छवि को धूमिल करते हैं और इससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है। हालांकि, निर्माताओं ने तर्क दिया कि फिल्म अभी रिलीज नहीं हुई है और इसे चुनौती देना समय से पहले की कार्रवाई है। अदालत अब इस मामले के कानूनी पहलुओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम सामाजिक प्रभाव पर आगे विचार करेगी।

By rohan