मिजोरम के किसानों की चूहों के साथ हताश जंग

मिजोरम के किसान वर्तमान में चूहों के भारी आतंक से जूझ रहे हैं, जो उनकी फसलों, विशेष रूप से धान और मकई को बड़े पैमाने पर नष्ट कर रहे हैं। यह स्थिति अक्सर ‘मौतम’ या ‘थिंगताम’ जैसे अकाल चक्रों से जुड़ी होती है, जो बांस के फूलों के खिलने के कारण चूहों की आबादी में अचानक और अत्यधिक वृद्धि से उत्पन्न होती है। किसानों के लिए यह एक अस्तित्व की लड़ाई बन गई है क्योंकि उनकी पूरी साल की मेहनत और खाद्य सुरक्षा दांव पर लगी है।

रिपोर्ट के अनुसार, चूहों के इस हमले से निपटने के लिए किसान पारंपरिक जाल और आधुनिक नियंत्रण विधियों का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन चूहों की संख्या इतनी अधिक है कि ये प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। स्थानीय समुदाय और प्रशासन इस संकट को कम करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं, क्योंकि फसलों के नुकसान का सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर पर पड़ रहा है। यह पारिस्थितिक घटना न केवल कृषि के लिए एक चुनौती है, बल्कि यह क्षेत्र में जैव विविधता और खाद्य श्रृंखला के जटिल संतुलन को भी दर्शाती है।

By rohan