49वें कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले का उद्घाटन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पारंपरिक तरीके से घंटा बजाकर किया। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कोलकाता पुस्तक मेला न सिर्फ भारत में नंबर वन है, बल्कि इसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई देती है। उन्होंने इसे बंगाल की बौद्धिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि जब वह विरोधी दल में थीं, तब पुस्तक मेले में आग लगने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई थी, लेकिन उस कठिन समय में भी वह मेले में पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि मैं हर साल पुस्तक मेले में आती हूं और यहां आकर मुझे गर्व का अनुभव होता है। जब तक जिंदा रहूंगी, पुस्तक मेले में आती रहूंगी।ममता बनर्जी ने कहा कि अगले साल कोलकाता पुस्तक मेला अपने 50 वर्ष पूरे करेगा, और इसकी ऐतिहासिक यात्रा की सुगबुगाहट इस साल से ही शुरू हो चुकी है। उन्होंने इसे बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय बताया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अर्जेंटीना को इस वर्ष के पार्टनर कंट्री के रूप में धन्यवाद दिया और कहा कि यह सहभागिता कोलकाता पुस्तक मेले के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप को और मजबूत करती है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला दुनिया के उन चुनिंदा मेलों में शामिल है जहां प्रवेश पूरी तरह निशुल्क है।उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष 27 लाख से अधिक पाठक मेले में पहुंचे थे । 23 करोड़ रुपये से अधिक की पुस्तकों की बिक्री हुई।इस वर्ष कुल 1100 स्टॉल लगाए गए हैं। 20 से अधिक देशों की भागीदारी इस मेले को वैश्विक पहचान देती है। ममता बनर्जी ने कहा कि किताबों की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती। भाषा, देश और महाद्वीप की दीवारें किताबों के सामने टिक नहीं पातीं।मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल से निकले छात्रों ने पूरे देश में अपनी प्रतिभा का डंका बजाया है और इसके पीछे यहीं की किताबों और अध्ययन संस्कृति की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि यहां पढ़ी गई किताबें ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी बनीं। डिजिटल युग पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज स्मार्टफोन, एआई और कंप्यूटर का दौर है, लेकिन हमें यह ध्यान रखना होगा कि किताबों के प्रति लोगों का रुझान कम न हो। उन्होंने स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि मैं खुद किताब लिखना पसंद करती हूं। कंप्यूटर पर काम करना मुझे पसंद नहीं। हाथ से लिखने में जो आनंद और संतोष है, उसकी तुलना किसी तकनीक से नहीं की जा सकती। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि पुस्तक हमारे लिए प्राण है। ममता बनर्जी ने अपने निजी जीवन और आय को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उनकी एकमात्र आय किताबों से मिलने वाली रॉयल्टी है और उन्होंने कभी सरकार से कोई पैसा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि मैं टैक्स लेकर कोई काम नहीं करती। मैं चाय भी अपने पैसे से पीती हूं, सर्किट हाउस में भी पैसे देकर रहती हूं, मेरे पास सभी बिल मौजूद हैं। मैंने अपनी सैलरी छोड़कर केंद्र और राज्य सरकार को करोड़ों रुपये जैसे दान दे दिए हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि पहले उनके निजी पुस्तक प्रदर्शनियों पर जांच एजेंसियों की नजर पड़ गई थी, इसलिए अब वह निजी प्रदर्शनी नहीं लगातीं और यह जिम्मेदारी एनजीओ को सौंप दी गई है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार ने सरस्वती पूजा के लिए दो दिन की छुट्टी देने का फैसला किया है, ताकि छात्र और शिक्षक बिना किसी बाधा के पूजा में शामिल हो सकें। पुस्तक प्रेमियों के लिए मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि मेला प्रांगण में में ‘बोई तीर्थÓ बनाया जाएगा। इसके लिए उन्होंने तत्काल 10 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेला सिर्फ आयोजन नहीं, यह हमारी आत्मा है। इसलिए इसके संरक्षण के लिए इंश्योरेंस और सुरक्षा बेहद जरूरी है। ममता बनर्जी ने कहा कि हर किसी को आलोचना का अधिकार है। समाज में दुष्ट लोगों की भी कमी नहीं होती, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि किताबें ही सभ्यता को आगे बढ़ाती हैं। जब तक मैं जीवित रहूंगी, कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में आती रहूंगी।
49वें कोलकाता पुस्तक मेले का भव्य उद्घाटन
