तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित नेता हुमायूँ कबीर ने आगामी चुनावों से ठीक पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। कबीर ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी अपनी राजनीति के लिए मुस्लिम समुदाय के वोटों का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन बदले में वे हिंदू मतदाताओं को लुभाने के लिए मंदिरों का निर्माण और हिंदू कार्ड खेल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में अल्पसंख्यकों के साथ केवल ‘वोट बैंक’ की तरह व्यवहार किया जा रहा है और विकास के वास्तविक मुद्दों पर उन्हें दरकिनार कर दिया गया है। उनके इस बयान ने बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद छेड़ दिया है।
हुमायूँ कबीर ने यह भी संकेत दिया कि मुस्लिम मतदाता अब टीएमसी के “दोहरे मापदंडों” को समझ चुके हैं और आने वाले समय में इसका असर चुनावी नतीजों पर दिखेगा। दूसरी ओर, टीएमसी नेतृत्व ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘हताशा में दिया गया बयान’ करार दिया है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि ममता बनर्जी सभी धर्मों का सम्मान करती हैं और उनका ‘सर्ब धर्म समन्वय’ का मॉडल पूरे देश के लिए एक मिसाल है। चुनाव से ऐन पहले कबीर की यह बयानबाजी मुर्शिदाबाद और आसपास के मुस्लिम बहुल इलाकों में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
