उचित वेतन से लेकर बुजुर्गों की देखभाल तक: बंगाल के छह युवा इनोवेटर्स ने Samsung Solve for Tomorrow के राष्ट्रीय टॉप 40 में बनाई जगह

श्रमिकों के लिए वेतन संबंधी जानकारी को समझना आसान बनाने से लेकर सुनने और बोलने में दिव्यांग लोगों के लिए संचार संबंधी बाधाओं को दूर करने तथा अकेले रहने वाले बुजुर्गों के सहयोग तक, बंगाल के छह युवा इनोवेटर्स ने Samsung Solve for Tomorrow के राष्ट्रीय टॉप 40 में जगह बनाई है।

राहुल गुप्ता, अनुष्का गुप्ता, सायक सामंता, सौफिर रहमान, शौरजिया चक्रवर्ती और ऐशी मुखोपाध्याय भारत के युवा इनोवेटर्स की उस नई पीढ़ी का हिस्सा हैं, जो अपने आसपास की समस्याओं को देख रही है और एक सरल सवाल पूछ रही है: क्या तकनीक इन समस्याओं को हल करने में मदद कर सकती है?

Samsung Solve for Tomorrow, 14 से 22 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए Samsung का प्रमुख CSR इनोवेशन कार्यक्रम है। डिजाइन थिंकिंग, मेंटरशिप और व्यावहारिक सीख के माध्यम से यह कार्यक्रम पूरे भारत के युवा इनोवेटर्स को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों की पहचान करने और संभावित समाधान विकसित करने में सक्षम बनाता है, जिससे उन्हें अपने विचारों को शुरुआती चरण से प्रोटोटाइप की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।

तीन विचार, छह युवा इनोवेटर्स

कोलकाता के राहुल गुप्ता और अनुष्का गुप्ता के लिए चुनौती वेतन में पारदर्शिता की है। निर्माण, घरेलू काम और कृषि जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए लागू न्यूनतम वेतन से जुड़ी जानकारी प्राप्त करना और उसे समझना मुश्किल हो सकता है, खासकर जब यह जानकारी लंबे या जटिल दस्तावेज़ों में दी गई हो।

उनका समाधान यह खोज करता है कि AI किस तरह वेतन से जुड़ी जानकारी को सरल और अधिक सुलभ बना सकता है, ताकि श्रमिक अपने अधिकार के अनुसार मिलने वाले वेतन को बेहतर ढंग से समझ सकें।

सायक सामंता और सौफिर रहमान SignBridge AI विकसित कर रहे हैं। यह समाधान सुनने और बोलने में दिव्यांग लोगों के लिए रोजमर्रा के संचार को अधिक सुलभ बनाने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। स्कूलों, अस्पतालों, कार्यस्थलों और सार्वजनिक सेवाओं में सांकेतिक भाषा के दुभाषिए हमेशा आसानी से उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में उनका समाधान वास्तविक समय में सांकेतिक भाषा को आवाज और टेक्स्ट में बदलने के लिए AI के उपयोग की संभावनाओं की पड़ताल करता है।
शौरजिया चक्रवर्ती और ऐशी मुखोपाध्याय का ध्यान अकेले रहने वाले बुजुर्गों के कल्याण पर है। अकेलापन, भावनात्मक परेशानी और संज्ञानात्मक क्षमता में शुरुआती गिरावट के संकेत कई बार नजरअंदाज हो सकते हैं, जबकि परिवार और देखभाल करने वालों के पास हमेशा बदलावों की तुरंत पहचान करने का कोई माध्यम नहीं होता। उनका समाधान इस बात की खोज करता है कि तकनीक किस तरह परिवारों और देखभाल करने वालों को बेहतर जानकारी उपलब्ध कराने और बुजुर्गों की अधिक सक्रिय रूप से सहायता करने में मदद कर सकती है।

तीन विचार। छह युवा इनोवेटर्स। और ऐसी चुनौतियां, जो श्रमिकों, दिव्यांग लोगों, वरिष्ठ नागरिकों और उनके परिवारों के जीवन को प्रभावित करती हैं।
उनकी उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब भारत का इनोवेशन मानचित्र खुद विस्तार कर रहा है। इस वर्ष Samsung Solve for Tomorrow की राष्ट्रीय टॉप 40 टीमों में आधे से अधिक टीयर-2 और टीयर-3 शहरों से हैं। यह दर्शाता है कि देश के अलग-अलग हिस्सों के युवा इनोवेटर्स वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए नए दृष्टिकोण लेकर सामने आ रहे हैं।

बंगाल के लिए राष्ट्रीय टॉप 40 में छह युवा इनोवेटर्स का शामिल होना गर्व का विषय है और यह क्षेत्र की विचारों, रचनात्मकता तथा समस्या-समाधान की लंबी परंपरा को भी दर्शाता है। इस वर्ष Samsung Solve for Tomorrow के AI Living for India तथा Health and Education विषयों के अंतर्गत बंगाल से सामने आए विचार यह दिखाते हैं कि युवा इनोवेटर्स केवल तकनीक पर ही नहीं, बल्कि उन लोगों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिनकी संभावित रूप से यह तकनीक मदद कर सकती है।

Samsung Solve for Tomorrow इस यात्रा में एक सहयोगी बनने का प्रयास करता है — युवा इनोवेटर्स को अपने विचारों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक मेंटरशिप, तकनीक, डिजाइन थिंकिंग कौशल और मंच प्रदान करता है।

टॉप 40 टीमें अब 10 दिवसीय इनोवेशन बूटकैंप में हिस्सा लेंगी, जहां उन्हें FITT-IIT दिल्ली में स्टार्टअप संस्थापकों और उद्योग विशेषज्ञों से गहन मेंटरशिप मिलेगी। बूटकैंप के तहत टीमों को Samsung R&D Institute India – Delhi, Samsung R&D Institute India – Noida, Samsung R&D Institute India – Bangalore, Samsung Design Delhi और गुरुग्राम स्थित Samsung के क्षेत्रीय मुख्यालय का दौरा करने का अवसर भी मिलेगा।

इसके बाद टीमें टॉप 20 में जगह बनाने के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगी। टॉप 20 में शामिल टीमों को ग्रैंड फिनाले से पहले अपने समाधानों को मजबूत करने और आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त सहयोग मिलेगा।

कार्यक्रम के समापन पर चार विजेता टीमों को सामूहिक रूप से 2 करोड़ रुपये की इनक्यूबेशन अनुदान राशि मिलेगी। इसके साथ ही FITT-IIT दिल्ली की ओर से इनक्यूबेशन सपोर्ट भी प्रदान किया जाएगा, जिससे उन्हें अपने समाधानों को आगे विकसित करने और बाजार के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी।

भारत के टीयर-2 और टीयर-3 शहरों से इनोवेटर्स की बढ़ती भागीदारी देश के इनोवेशन परिदृश्य में हो रहे एक बड़े बदलाव की ओर संकेत करती है। अच्छे विचार किसी भौगोलिक सीमा से तय नहीं होते। वे कहीं से भी उभर सकते हैं — जहां युवा किसी समस्या का सामना करते हैं, सवाल करते हैं कि वह क्यों मौजूद है और उसके समाधान के लिए कुछ करने का निर्णय लेते हैं।

बंगाल के छह इनोवेटर्स के लिए राष्ट्रीय टॉप 40 में जगह बनाना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण है — और यह एक और संकेत है कि भारत का अगला बड़ा समाधान देश के किसी भी कोने से सामने आ सकता है।

By Business Bureau