सेबी ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए म्यूचुअल फंड नियमों में किया बड़ा बदलाव

बाजार नियामक सेबी ने म्यूचुअल फंड नियमों में व्यापक बदलावों की घोषणा की है, जो १ अप्रैल, २०२६ से लागू होंगे। इस नए ढांचे के तहत, सेबी ने ‘बेस एक्सपेंस रेशियो’ (बीईआर) की अवधारणा पेश की है, जो फंड प्रबंधन शुल्क को जीएसटी और सुरक्षा लेनदेन कर (एसटीटी) जैसे वैधानिक शुल्कों से अलग करती है। इसका मुख्य उद्देश्य निवेशकों के लिए पारदर्शिता बढ़ाना और म्यूचुअल फंड योजनाओं की व्यय संरचना को अधिक स्पष्ट बनाना है। साथ ही, नियामक ने अधिकांश फंड श्रेणियों के लिए व्यय अनुपात की सीमा को भी कम कर दिया है।

इन नए नियमों के अनुसार, म्यूचुअल फंड योजनाओं के सभी खर्चों को स्पष्ट रूप से पहचाना जाना चाहिए और वे निर्धारित आधार सीमा के भीतर होने चाहिए। यदि कोई खर्च इन सीमाओं से अधिक होता है, तो उसका बोझ एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी), ट्रस्टी या प्रायोजकों को उठाना होगा। इसके अलावा, सेबी ने ब्रोकरेज की सीमा को ०.१२ प्रतिशत से घटाकर ०.०६ प्रतिशत और डेरिवेटिव लेनदेन के लिए ०.०५ प्रतिशत से घटाकर ०.०२ प्रतिशत कर दिया है। निवेशकों के साथ संचार को डिजिटल बनाने के लिए वार्षिक रिपोर्ट को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा और समाचार पत्रों में विज्ञापन की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है।

By rohan