मशहूर गायिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन

मशहूर सिंगर आशा भोसले (92), जिन्होंने अपनी सुरीली आवाज़ से दशकों तक लाखों म्यूज़िक फ़ैन्स का मनोरंजन किया, ने 12 अप्रैल, 2026 को मुंबई में आखिरी सांस ली। वह कुछ समय से बढ़ती उम्र और सांस की दिक्कतों से जूझ रही थीं और मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। मेडिकल सोर्स से पता चला है कि उनकी मौत हार्ट अटैक और मल्टीपल ऑर्गन फेलियर की वजह से हुई। उनकी मौत पर पूरे देश में गहरा दुख है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शोक संदेश में आशा भोसले की तारीफ़ करते हुए उन्हें भारत की सबसे वर्सेटाइल सिंगर्स में से एक बताया। उनकी आवाज़ हमेशा याद रहने वाली है। उन्होंने इंडियन कल्चर के लिए उनकी सेवाओं को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे यादगार हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के ज़रिए उनके साथ अपनी यादें शेयर करके अपनी हमदर्दी ज़ाहिर की। कई सेलिब्रिटीज़ श्रद्धांजलि देते हुए कह रहे हैं कि भले ही वह हमारे बीच फिजिकली नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज़ लोगों की ज़िंदगी में गूंजती रहेगी। 1933 में मंगेशकर परिवार में जन्मी आशा भोसले ने कम उम्र में ही अपने म्यूज़िक का सफ़र शुरू कर दिया था। करीब आठ दशकों तक चला उनका सिंगिंग का सफ़र भारतीय संगीत के इतिहास का एक सुनहरा अध्याय है। उन्होंने 20 से ज़्यादा भाषाओं में 12,000 से ज़्यादा गाने गाए हैं और उन्हें दुनिया में सबसे ज़्यादा गाने रिकॉर्ड करने वाली सिंगर के तौर पर पहचाना जाता है।उनकी सिंगिंग की वैरायटी ज़बरदस्त है। सुरीले गाने, एनर्जेटिक डांस नंबर, ग़ज़लें, भजन, कोई भी जॉनर हो, उनकी आवाज़ में एक खास मिठास थी। खासकर उमराव जान और इजाज़त जैसी फ़िल्मों में उनकी गाई ग़ज़लें संगीत प्रेमियों के दिलों में बसी हुई हैं। अपनी बहन, सुरों की मल्लिका लता मंगेशकर के बाद, सिंगर आशा भोसले ने भारतीय संगीत साम्राज्य में वही सम्मान हासिल किया है। भारत सरकार ने उन्हें संगीत इंडस्ट्री में उनकी ज़बरदस्त सेवाओं के लिए ‘पद्म विभूषण’ और ‘दादासाहेब फाल्के’ जैसे बड़े अवॉर्ड से सम्मानित किया है। उनके नाम दो नेशनल अवॉर्ड और सात फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड भी हैं। उनके निधन से न सिर्फ़ टॉलीवुड और बॉलीवुड… बल्कि इंटरनेशनल म्यूज़िक जगत भी शोक में डूब गया है। कई फिल्मी हस्तियां, म्यूजिक डायरेक्टर और फैंस सोशल मीडिया पर उनके गानों को याद कर रहे हैं और श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

By Arbind Manjhi