AGM टलने के बाद Tata Sons को राहत, कंपनी रजिस्ट्रार ने दी मोहलत; साल के अंत तक करनी होगी बैठक

टाटा संस की वार्षिक आम बैठक (AGM) कोरम यानी बैठक के लिए जरूरी न्यूनतम उपस्थिति पूरी नहीं होने के कारण स्थगित हो गई थी। हालांकि, इसके महज 10 दिन बाद कंपनी रजिस्ट्रार (ROC) ने टाटा संस को AGM आयोजित करने के लिए साल के अंत तक का समय दे दिया है।

कंपनी कानून के तहत AGM आयोजित करने की निर्धारित अंतिम तारीख 30 सितंबर, 2026 थी, जो लेखा वर्ष समाप्त होने के छह महीने के भीतर आती है। हालांकि, एक सूत्र के मुताबिक, कंपनी मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले कंपनी रजिस्ट्रार कार्यालय ने 27 अगस्त को जारी एक पत्र के जरिए टाटा संस को AGM के लिए तीन महीने की अतिरिक्त मोहलत दी है। इसके बाद कंपनी के पास बैठक आयोजित करने के लिए 31 दिसंबर, 2026 तक का समय होगा।

सूत्र ने बताया कि कंपनी रजिस्ट्रार की ओर से समयसीमा बढ़ाने का फैसला टाटा संस के नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता को देखते हुए लिया गया है। दरअसल, AGM के एजेंडे में चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल के विस्तार का प्रस्ताव भी शामिल था, लेकिन कोरम पूरा नहीं होने के कारण इस पर चर्चा नहीं हो सकी।

समयसीमा बढ़ाने का फैसला टाटा संस की उस अपील के बाद लिया गया, जिसमें सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) पर लगी रोक के कारण पैदा हुई असाधारण स्थिति का हवाला दिया गया था। कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 96(1) के तहत एक व्यक्ति वाली कंपनी को छोड़कर सभी कंपनियों के लिए हर साल AGM आयोजित करना अनिवार्य है।

कंपनी रजिस्ट्रार ने तीन महीने की मोहलत देते हुए टाटा संस को यह भी चेतावनी दी है कि भविष्य में कंपनी अधिनियम के तहत सभी जरूरी प्रावधानों और अनुपालनों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए।

अगर साल के अंत तक सर रतन टाटा ट्रस्ट पर लगी रोक जारी रहती है, तो आगे की कार्रवाई के लिए यह मामला राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील पंचाट (NCLAT) तक पहुंच सकता है।

टाटा ट्रस्ट्स की प्रमुख हिस्सेदार सर रतन टाटा ट्रस्ट पर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की ओर से लगाई गई रोक के चलते 18 अगस्त को प्रस्तावित टाटा संस की AGM को स्थगित करना पड़ा था। सर रतन टाटा ट्रस्ट की टाटा संस में 66 फीसदी हिस्सेदारी है।

टाटा संस, नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार करने वाले टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है। समूह के 100 साल से अधिक लंबे इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब AGM को इस तरह स्थगित करना पड़ा। चैरिटी कमिश्नर का आदेश महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट में हुए एक बदलाव के कथित उल्लंघन के मामले में आया था। इस बदलाव के तहत ट्रस्ट के बोर्ड में हमेशा बने रहने वाले ट्रस्टियों यानी परपेचुअल ट्रस्टी की संख्या कुल सदस्यों के 25 फीसदी से अधिक नहीं हो सकती।

टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA) के अनुसार, AGM में शामिल होने के लिए प्रमुख ट्रस्टों—सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT)—द्वारा संयुक्त रूप से नामित प्रतिनिधियों की मौजूदगी जरूरी है। इनमें से एक ट्रस्ट पर रोक होने के कारण बैठक के लिए आवश्यक शर्तें पूरी नहीं हो सकीं और AGM नहीं हो पाई।

AGM में एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल के विस्तार पर भी फैसला होना था, जिसे आमतौर पर एक सामान्य प्रक्रिया माना जाता है। लेकिन बैठक नहीं हो पाने के कारण टाटा संस के निदेशक के रूप में चंद्रशेखरन की स्थिति को लेकर असमंजस बना हुआ है।

इसी बीच, चंद्रशेखरन ने इस महीने की शुरुआत में टाटा संस के बोर्ड को पत्र लिखकर बताया था कि फरवरी 2027 में चेयरमैन के तौर पर उनका मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह अगले कार्यकाल के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाएंगे। अक्टूबर 2016 में साइरस मिस्त्री को पद से हटाए जाने के बाद चंद्रशेखरन फरवरी 2017 में टाटा संस के चेयरमैन बने थे। उनके पत्र में यह भी बताया गया था कि बोर्ड का एक सदस्य उनके तीसरे कार्यकाल के पक्ष में नहीं था।

पिछले साल टाटा ट्रस्ट्स ने एक प्रस्ताव पारित कर चंद्रशेखरन को टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन के तौर पर पांच साल का तीसरा कार्यकाल देने की सिफारिश की थी। हालांकि, फरवरी 2026 में टाटा संस की बोर्ड बैठक के दौरान टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने एयर इंडिया और टाटा डिजिटल जैसी कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर सवाल उठाए थे। इसके बाद चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर चर्चा आगे नहीं बढ़ सकी।

By sunny