रिलायंस को आशा: वर्ष २०२६ तक सुलझ सकता है केजी बेसिन का २४.७ करोड़ डॉलर का विवाद

रिलायंस इंडस्ट्रीज को उम्मीद है कि सरकार के साथ कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन को लेकर चल रहा २४.७ करोड़ डॉलर का पुराना विवाद नए साल २०२६ तक सुलझ जाएगा। कंपनी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी दी है कि यह अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अब अपने अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। रिलायंस का तर्क है कि साल २००२ से जारी इस परियोजना में सभी निर्णय एक प्रबंधन समिति द्वारा लिए गए हैं, जिसमें सरकार के दो प्रतिनिधि शामिल थे। कंपनी के अनुसार, समिति की अनुमति के बिना न तो कोई खर्च किया गया और न ही कोई निर्णय लागू हुआ, इसलिए बाद में लागतों को अमान्य ठहराना अनुबंध की मूल भावना के खिलाफ है।

दूसरी ओर, सरकार का पक्ष है कि कंपनी द्वारा दिखाए गए कुछ खर्च लागत-वसूली के दायरे में नहीं आते, जिसके कारण ‘विंडफॉल टैक्स’ (अप्रत्याशित लाभ पर कर) की माँग की गई है। इसके जवाब में रिलायंस का कहना है कि नई खनन लाइसेंसिंग नीति के तहत ऑपरेटर को पहले अपनी पूरी लागत वसूलने का अधिकार है, उसके बाद ही सरकार को लाभ में हिस्सा मिलता है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस परियोजना में सरकार का कोई प्रत्यक्ष निवेश नहीं था और सारा व्यावसायिक जोखिम ऑपरेटर ने उठाया है, जबकि सरकार को पेट्रोलियम के रूप में पर्याप्त मुनाफा और सब्सिडी में बचत का लाभ पहले ही मिल चुका है।

By rohan