सिलीगुड़ी में रेलवे की जमीन पर बरसों से रह रहे लोगों को बिना पुनर्वास बेघर किए जाने की आशंका के बीच एक नागरिक मंच ने कड़ा रुख अपनाया है। मंच का साफ कहना है कि रेलवे की जमीन पर उनका कोई मालिकाना हक नहीं है, लेकिन विकास कार्यों के नाम पर यदि लोगों को हटाया जाता है, तो उससे पहले प्रभावित परिवारों के लिए उचित पुनर्वास की पुख्ता व्यवस्था की जानी चाहिए। इसी मुख्य मांग को लेकर ‘सिलीगुड़ी रेलवे भूमि निवासी पुनर्वास अधिकार मंच’ सामने आया है।
रेलवे भूमि निवासी पुनर्वास अधिकार मंच का कहना है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक उजाड़ दिए जाने से गरीब परिवारों के समक्ष रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाता है। इसलिए बेदखली से पहले प्रत्येक प्रभावित परिवार को सम्मानजनक तरीके से पुनर्वासित किया जाए। विशेष रूप से प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) जैसी सरकारी आवास योजनाओं के तहत उन्हें स्थायी घर उपलब्ध कराने की मांग की गई है। मंच के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि वे रेलवे की जमीन के मालिकाना हक की कोई मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि यदि विकास और निर्माण कार्यों के लिए लोगों को हटाना जरूरी भी है, तो प्रशासन को इन परिवारों के भविष्य और आशियाने को सुरक्षित करने के बाद ही कोई कदम उठाना चाहिए।
मंच की मांग है कि रेलवे लाइन, सड़क, पुल या अन्य बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ विकास का लाभ समाज के इन गरीब, भूमिहीन और बेघर लोगों तक भी पहुंचना चाहिए। अब इस महत्वपूर्ण मांग के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और रेलवे प्राधिकरण क्या रुख अपनाता है और इस पर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
