सिलीगुड़ी के ऐतिहासिक ‘मित्र सम्मलीनी’ की 100वीं दुर्गा पूजा की तैयारियां शुरू; रथयात्रा पर आज संपन्न हुआ पारंपरिक ‘काठामो पूजा’ अनुष्ठान

उत्तर बंगाल के सबसे प्रमुख शहरों में से एक, सिलीगुड़ी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाले ‘मित्र सम्मलीनी’ क्लब में आज से दुर्गा पूजा की औपचारिक तैयारियां शुरू हो गईं। रथयात्रा के पावन अवसर पर आज क्लब परिसर में अत्यंत विधि-विधान के साथ 100वें वर्ष की ऐतिहासिक दुर्गा पूजा का ‘काठामो पूजा’ (दुर्गा मूर्ति के लकड़ी के ढांचे का पूजन) अनुष्ठान संपन्न हुआ।शताब्दी वर्ष को लेकर भारी उत्साहसिलीगुड़ी के हिल कार्ट रोड स्थित ‘मित्र सम्मलीनी’ क्लब की दुर्गा पूजा इस वर्ष अपने ऐतिहासिक 100वें वर्ष (शताब्दी वर्ष) में प्रवेश कर रही है।

आज सुबह से ही इस विशेष काठामो पूजा को देखने और मां दुर्गा का आशीर्वाद लेने के लिए क्लब के सदस्यों के साथ-साथ भारी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पूरे मण्डप में शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से एक दिव्य वातावरण निर्मित हो गया।परंपरा और संस्कृति की अनूठी मिसालआज के आधुनिक और थीम-आधारित पूजा के दौर में भी ‘मित्र सम्मलीनी’ अपनी 100 साल पुरानी सनातन परंपराओं, शुद्ध अनुष्ठानों और एकचाला (एक ही ढांचे में सभी मूर्तियां) की सादगी को बनाए रखने के लिए प्रसिद्ध है।

आज के पूजन के साथ ही अब मूर्तिकार द्वारा इसी पवित्र काठामो (ढांचे) पर मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा को रूप देने का काम शुरू कर दिया जाएगा।भव्य आयोजन की तैयारी में जुटे सदस्यपूजा कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि चूंकि यह उनका 100वां वर्ष है, इसलिए इस बार की दुर्गा पूजा को और भी भव्य, यादगार और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए विशेष रूप से तैयारियां की जा रही हैं। इस ऐतिहासिक मील के पत्थर को लेकर न केवल क्लब के सदस्य, बल्कि पूरे सिलीगुड़ी शहर के नागरिकों में जबरदस्त उत्साह का माहौल है।

By Sonakshi Sarkar