इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट २०२६ (दो हजार छब्बीस) के चौथे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई के लिए भारत के व्यापक ‘मानव विजन’ को दुनिया के सामने रखा। इस विजन का मुख्य उद्देश्य एआई शासन को मानव-केंद्रित, नैतिक, जवाबदेह और समावेशी बनाना है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि एआई को केवल रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का क्षेत्र नहीं बल्कि समावेशन और सशक्तिकरण का साधन बनना चाहिए, विशेष रूप से ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के लिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अब केवल एआई क्रांति का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसका नेतृत्व कर रहा है।
शिखर सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गईं, जिनमें टाटा समूह और ओपनएआई के बीच एआई नवाचार को बढ़ावा देने के लिए साझेदारी प्रमुख है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने घोषणा की कि वे ऑटोमोटिव क्षेत्र के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए एआई-अनुकूलित चिप्स विकसित कर रहे हैं। हालांकि, एपस्टीन फाइल्स विवाद के कारण बिल गेट्स ने अपने मुख्य भाषण में भाग नहीं लिया। रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने भी समावेशी एआई विकास पर जोर देते हुए इसे भारतीय डेटा और प्रतिभा की ताकत से जोड़ने की बात कही।
