असम में पिछले एक दशक में १,००,००० से अधिक परिपक्व पेड़ काटे गए विशेषज्ञों ने प्रभाव अध्ययन की आवश्यकता पर दिया जोर

एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, असम में पिछले १० वर्षों के दौरान विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए १,००,००० से अधिक पूर्ण विकसित पेड़ों को काटा गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस भारी संख्या में हुए वृक्षारोपण के नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की है, क्योंकि ये परिपक्व पेड़ स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नए पौधे लगाना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन वे दशकों पुराने पेड़ों द्वारा प्रदान की जाने वाली कार्बन सोखने की क्षमता और पर्यावरणीय सेवाओं की तुरंत भरपाई नहीं कर सकते।

पर्यावरणविदों ने मांग की है कि भविष्य की किसी भी बड़ी परियोजना से पहले एक व्यापक ‘प्रभाव अध्ययन’ किया जाना अनिवार्य होना चाहिए। उनका तर्क है कि केवल पेड़ों की संख्या गिनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वनस्पति के नुकसान से स्थानीय जलवायु, वन्यजीवों के आवास और जल स्तर पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन करना भी आवश्यक है। असम जैसे संवेदनशील क्षेत्र में, जहाँ प्राकृतिक संतुलन पहले से ही खतरे में है, विशेषज्ञों ने सतत विकास की आवश्यकता पर बल दिया है ताकि प्रगति और प्रकृति के बीच एक सही तालमेल बिठाया जा सके।

By rohan