मणिपाल हॉस्पिटल रंगापानी, मणिपाल हॉस्पिटल्स ग्रुप की एक प्रमुख इकाई, ने रेडिएशन थेरेपी के दौरान या हाल ही में उपचार पूरा करने वाले मरीजों को होली के समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है, ताकि त्वचा की अतिसंवेदनशीलता, एलर्जी और समग्र स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से बचा जा सके। रेडिएशन थेरेपी के कारण उपचारित त्वचा का भाग अत्यंत संवेदनशील, नाजुक और आसानी से जलन या सूजन का शिकार हो सकता है। वर्तमान में जो मरीज रेडिएशन थेरेपी ले रहे हैं, उन्हें उपचारित स्थान पर चिकित्सक द्वारा निर्धारित मरहम के अलावा किसी भी रासायनिक पदार्थ का उपयोग न करने की सख्त सलाह दी गई है। कृत्रिम रंगों में मौजूद रसायन उपचारित त्वचा के साथ प्रतिकूल प्रतिक्रिया कर सकते हैं। यदि कोई मरीज उत्सव में भाग लेना चाहता है, तो बहुत सावधानी के साथ शरीर के छोटे से हिस्से पर ही रंग का प्रयोग करें और उपचारित भाग से पूरी तरह बचें। कृत्रिम रंगों की बजाय प्राकृतिक रंगों का उपयोग करना अधिक सुरक्षित है।
जिन मरीजों ने सफलतापूर्वक रेडिएशन थेरेपी पूरी कर ली है और तीव्र दुष्प्रभावों से उबर चुके हैं, उन्हें भी सतर्क रहना आवश्यक है। त्योहार के दौरान खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इस समय रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्यतः कम होती है। इसके अतिरिक्त, शराब, भांग आदि मादक पदार्थों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए, क्योंकि ये स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। विशेष रूप से फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। रेडिएशन थेरेपी या कीमोथेरेपी के दौरान अथवा उपचार पूर्ण होने के बाद भी रंगों के पाउडर के संपर्क से बचना चाहिए, क्योंकि इससे एलर्जी, सांस लेने में तकलीफ या पहले से मौजूद श्वसन संबंधी समस्याएँ (जैसे सीओपीडी) बढ़ सकती हैं।
डॉ. पृथ्विजीत मैत्र, एसोसिएट कंसल्टेंट – रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, मणिपाल हॉस्पिटल, रंगापानी ने कहा, “रेडिएशन थेरेपी से त्वचा की संवेदनशीलता बढ़ जाती है और उपचार पूरा होने के बाद भी कुछ समय तक त्वचा और आंतरिक ऊतक कमजोर रहते हैं। होली के दौरान मरीजों को उपचारित स्थान पर रासायनिक रंग लगाने और जोर से रगड़कर साफ करने से बचना चाहिए। फेफड़ों के कैंसर के मरीजों को पाउडर रंगों के संपर्क से दूर रहना चाहिए, क्योंकि रंग श्वास के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर श्वसन संबंधी जटिलताएँ उत्पन्न कर सकते हैं। त्योहार का आनंद अवश्य लिया जा सकता है, लेकिन अनावश्यक स्वास्थ्य जोखिम से बचने के लिए सुरक्षा और संयम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।” मणिपाल हॉस्पिटल सिलीगुड़ी, रंगापानी ने मरीजों और उनके परिवारजनों से अपील की है कि वे त्योहार की गतिविधियों में भाग लेने से पहले संबंधित ऑन्कोलॉजिस्ट से परामर्श अवश्य लें, ताकि सुरक्षित और स्वस्थ तरीके से उत्सव मनाया जा सके।
