मालदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कार्यरत संविदा आधारित अस्थायी कर्मचारियों ने बकाया वेतन, वेतन कटौती और छंटनी के विरोध में आंदोलन तेज कर दिया है। मंगलवार दोपहर से रात साढ़े नौ बजे तक एमएसवीपी को घेरकर विरोध प्रदर्शन करने के बाद, बुधवार सुबह से कर्मचारियों ने कार्यबहिष्कार कर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस आंदोलन के चलते अस्पताल में इलाज के लिए आए मरीजों और उनके परिजनों को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। कई वार्डों में कर्मचारियों के काम पर न होने से मरीजों के परिजन खुद ही मरीजों को गोद में उठाकर वार्ड तक ले जाने को मजबूर हुए।
आंदोलनकारी कर्मचारियों का आरोप है कि वे एक ठेका कंपनी के अधीन काम करते हैं, लेकिन ठेका कंपनी ने पिछले पांच महीनों से उनका वेतन नहीं दिया है। इसके अलावा पीएफ और ईएसआई जैसी सुविधाएं भी सही तरीके से नहीं मिल रही हैं। कर्मचारियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और काम के बीच थोड़ी देर आराम करने पर भी कंपनी की नाराजगी झेलनी पड़ती है। कुछ कर्मचारियों को बिना कारण काम से हटा दिया गया है और शिकायत करने पर धमकी व डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया गया है।
इन सभी मांगों को लेकर मंगलवार को दिनभर कर्मचारियों ने अस्पताल के सुपर और असिस्टेंट सुपर को घेरकर विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसी के विरोध में बुधवार से उन्होंने कार्यबहिष्कार के साथ धरना-प्रदर्शन शुरू किया है। कर्मचारियों का साफ कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें नहीं मानी जातीं और बकाया पांच महीने का वेतन नहीं दिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
