भारत में ‘फाउंडर’ प्रोफाइल्स में 104% की वृद्धि, एआई ने बढ़ाया ‘पोर्टफोलियो कॅरियर्स’ का चलन

भारत वैश्विक स्तर पर उद्यमिता (एंटरप्रेन्योरशिप) कैसे विकसित हो रही है, इसका एक प्रमुख संकेतक बनकर उभर रहा है। लिंक्डइन के डेटा के अनुसार, भारत में अपने प्रोफाइल में ‘फाउंडर’ जोड़ने वाले सदस्यों में साल-दर-साल 104% की वृद्धि हुई है, जो सभी बाजारों में सबसे अधिक है। साथ ही उद्यमिता की गतिविधियों और महत्वाकांक्षा में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। यह नई पीढ़ी के उद्यमी तब उभर रहे हैं जब एआई पारंपरिक बाधाओं को कम कर रहा है, करियर की प्राथमिकताएं बदल रही हैं और सफलता की परिभाषा विकसित हो रही है। जेन ज़ी अधिक लचीले कामकाजी तरीकों की ओर बढ़त बना रहा है, जिसमें चार में से तीन (75%) जेन ज़ी उद्यमियों के पास कमाई के कई जरिए हैं, जबकि जेन एक्स में यह आंकड़ा 62% है। इससे पोर्टफोलियो कॅरियर की ओर बदलाव साफ दिखता है, जो मजबूती बढ़ाने और काम व आय पर अधिक नियंत्रण रखने के लिए तैयार किया जाता है।

एआई और डिजिटल टूल्स की वजह से अब बिजनेस शुरू करना बहुत आसान हो गया है। इसने भारी खर्च, पहचान न होने या अनुभव की कमी जैसी पुरानी मुश्किलों को खत्म कर दिया है। भारत में 80% फाउंडर्स का कहना है कि आज कोई भी व्यक्ति उद्यमी बन सकता है, चाहे वह किसी भी बैकग्राउंड से हो। साथ ही, 81% का मानना है कि आज के दौर में सफल बिजनेस बनाना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मुमकिन है। युवा उद्यमी इस बदलाव को आगे बढ़ा रहे हैं। जेन ज़ी उद्यमियों में 85% का कहना है कि उनके व्यवसाय के लिए एआई और डिजिटल टूल्स महत्वपूर्ण हैं तथा कई इसे अपना व्यवसाय शुरू करना संभव बनाने का श्रेय देते हैं।

जहां वित्तीय स्वतंत्रता जैसी प्रेरणाएं पीढ़ियों से चली आ रही हैं, वहीं युवा उद्यमी अब सफलता को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं। भारत में जेन ज़ी के लिए सफलता का अर्थ है: स्वतंत्रता और लचीलापन (64%), व्यक्तिगत विकास (56%) और वित्तीय संपन्नता (55%), और वे इसे हासिल करने के लिए जोखिम उठाने के लिए अधिक तैयार हैं। वे प्रयोग करने के मामले में भी आगे हैं और पिछली पीढ़ियों की तुलना में उद्यमिता के नए रास्ते तलाशने और आजमाने के लिए ज्यादा तैयार रहते हैं।

By Business Bureau