केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रीजीजू ने ‘पैसा बांटकर चुनाव जीतने’ की प्रथा की कड़ी आलोचना की है और बंगाल की उस ऐतिहासिक चुनावी संस्कृति की सराहना की है जहाँ कभी बिना पैसे बांटे चुनाव लड़े जाते थे। न्यू टाउन में आयोजित नवनिर्वाचित विधायकों के एक ओरिएंटेशन प्रोग्राम को संबोधित करते हुए रीजीजू ने अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष दो हजार चार में जब वे पहली बार सांसद बने थे, तब वामपंथी सांसदों से बातचीत के दौरान उन्हें यह जानकर बेहद आश्चर्य हुआ था कि बंगाल में उम्मीदवार मात्र पांच हजार से दस हजार रुपये के खर्च में चुनाव लड़ लेते थे।
माकपा के नेता सुजन चक्रवर्ती ने रीजीजू के इस बयान का समर्थन किया, लेकिन साथ ही यह भी रेखांकित किया कि पिछले पंद्रह वर्षों में तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल के दौरान यह गौरवशाली राजनीतिक संस्कृति पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि टीएमसी ने न केवल वोटों को खरीदने के लिए धनबल का इस्तेमाल शुरू किया, बल्कि राजनीति को असीमित संपत्ति कमाने का जरिया बना दिया है। विपक्षी दलों ने टीएमसी नेताओं के पास से हाल ही में बरामद हुए भारी कैश और भ्रष्टाचार के मामलों का हवाला देते हुए सत्ताधारी दल पर चुनावों में अनुचित धन खर्च करने और वोटरों को डराने का आरोप लगाया है, हालांकि वाम दल ने इस मामले में बीजेपी को भी पूरी तरह से क्लीन चिट देने से इनकार किया है।
