बाजार नियामक सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस में स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा है कि उन्हें अपने कर्तव्यों का पालन करते समय ‘रचनात्मक दृष्टिकोण’ अपनाने की आवश्यकता है। मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए पांडेय ने स्पष्ट किया कि स्वतंत्र निदेशकों का कार्य केवल कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करना या प्रबंधन की आलोचना करना नहीं है, बल्कि उन्हें जवाबदेही के साथ समस्याओं का समाधान खोजने और कंपनी का समर्थन करने की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। उनकी यह टिप्पणी एचडीएफसी बैंक के स्वतंत्र निदेशक अतनु चक्रवर्ती के हालिया इस्तीफे के बाद आई है, जिन्होंने मूल्यों और नैतिकता में विसंगति का हवाला दिया था।
सेबी प्रमुख ने भारतीय उद्योग परिसंघ के एक कार्यक्रम में कहा कि स्वतंत्रता अपने आप में अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि एक शुरुआत है। उन्होंने स्वतंत्र निदेशकों के लिए क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया ताकि वे जोखिम प्रबंधन और वित्तीय मामलों की बेहतर निगरानी कर सकें। पांडेय के अनुसार, कंपनी के भीतर उठने वाले मुद्दों पर चर्चा निदेशक मंडल के बंद कमरों में होनी चाहिए ताकि कंपनी के प्रदर्शन और बाजार पूंजीकरण पर नकारात्मक असर न पड़े, जिसका सीधा प्रभाव शेयरधारकों पर होता है। सेबी अब उद्योग संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर स्वतंत्र निदेशकों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में पहल करेगा।
