वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि सरकार बजट सत्र के दूसरे भाग में, जो ९ मार्च से शुरू होगा, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता संशोधन विधेयक पेश करेगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आईडीबीआई बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया सही दिशा में है और यह जल्द ही पूरी हो सकती है। सरकार का लक्ष्य विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण के माध्यम से राजस्व सृजन को आधार बनाना है, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के केंद्रीय उद्यमों की ‘फ्री फ्लोटिंग’ बढ़ेगी। आगामी वित्त वर्ष २०२७ के लिए विविध पूंजीगत प्राप्तियों से राजस्व का अनुमान ८०,००० करोड़ रुपये रखा गया है, जो वित्त वर्ष २०२६ के संशोधित अनुमान से ३३,८३७ करोड़ रुपये अधिक है।
आर्थिक विकास और रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, सरकार ने वित्त वर्ष २०२६-२७ के बजट में १२.२ लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय की घोषणा की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में २.२ लाख करोड़ रुपये अधिक है। वित्त मंत्री ने कर आधार को बढ़ाने और प्रत्यक्ष कर संग्रह में वृद्धि पर भी जोर दिया है। इसके अतिरिक्त, देश के ऋण-से-जीडीपी अनुपात में सुधार की उम्मीद है, जिसके २०२६-२७ में ५५.६ प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि २०२५-२६ में यह ५६.१ प्रतिशत था। यह बजट दर्शाता है कि सरकार की प्राथमिकता घाटे को नियंत्रित करते हुए विकास की गति को तेज करना है।
