नमक पर नए सिरे से सोच: विश्व नमक जागरूकता सप्ताह 2026 और भारतीय परिवारों की सेहत

नमक दुनिया भर की रसोइयों में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाली चीज़ों में से एक है, और सेहत पर इसके सही असर को गहराई से समझना बेहद ज़रूरी है। ‘विश्व नमक जागरूकता सप्ताह 2026’ दुनिया भर में सेहत को बेहतर बनाने की एक बढ़ती आवश्यकता पर नए सिरे से ध्यान खींच रहा है: और वह है खाने में सोडियम की सही मात्रा चुनकर शरीर को स्वस्थ और सुरक्षित रखना। मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में लोग रोजाना लगभग 10.8 ग्राम नमक खा रहे हैं, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा तय की गई मात्र 5 ग्राम से कम की सुरक्षित सीमा से दोगुनी से भी ज़्यादा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस अतिरिक्त नमक का एक बड़ा हिस्सा खाना पकाने के दौरान डाले गए नमक से नहीं आता, बल्कि बाज़ार की चीज़ों से आता है। ब्रेड, सीरियल्स, सॉस और स्नैक्स जैसे प्रोसेस्ड और पैकेटबंद खानों में इतना ज़्यादा सोडियम छिपा होता है, जिस पर हमारा ध्यान ही नहीं जाता। लिंक: वर्ल्ड एक्शन ऑन सॉल्ट, शुगर एंड हेल्थ – दुनिया भर में नमक खपत के आंकड़े ; विश्व स्वास्थ्य संगठन – सोडियम सेवन से जुड़े दिशानिर्देश

नमक का अधिक सेवन सीधे तौर पर बढ़े हुए हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ा हुआ है, और यह दिल की बीमारी, स्ट्रोक, व किडनी की बीमारी के खतरे को काफी बढ़ा सकता है। 

लिंक: विश्व स्वास्थ्य संगठन – सोडियम सेवन से जुड़े दिशानिर्देश (ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी, स्ट्रोक, किडनी की बीमारी के लिए) 

क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर के पबमेड (2024) शोध के अनुसार, आहार में नमक का ज़्यादा होना मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं की हड्डियों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। (हड्डियों के स्वास्थ्य/कैल्शियम के नुकसान के लिए)

हालाँकि, भारत के लिए नमक से जुड़ी इस चर्चा का एक और पहलू भी है, जो उतना ही महत्वपूर्ण है। हमारे देश में आयोडीन की कमी आज भी जन-स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी और लगातार बनी रहने वाली चिंता है, और इस कमी को दूर करने के लिए आयोडीन युक्त नमक ही सबसे व्यावहारिक और हर किसी तक पहुँचने वाला सबसे आसान साधन है। आयोडीन एक ऐसा अनिवार्य पोषक तत्व है जो थायराइड ग्रंथि को पूरी कार्यक्षमता के साथ स्वस्थ रखने में मदद करता है, हमारे मेटाबॉलिज्म (पाचन और ऊर्जा प्रणाली) को नियंत्रित करता है, और खासकर छोटे बच्चों के दिमागी विकास व गर्भावस्था के दौरान एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसी स्थिति में, हम किस तरह का नमक खा रहे हैं इस बात पर ध्यान दिए बिना, अगर सिर्फ नमक की मात्रा कम की गई, तो शरीर की इस ज़रूरी पोषण संबंधी ज़रूरत के नजरअंदाज होने का खतरा पैदा हो सकता है।

लिंक्स: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय – राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम (NIDDCP)

इसी संदर्भ में, टाटा सॉल्ट पिछले चार दशकों से भी अधिक समय से भारतीय परिवारों में एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत के पहले ब्रांडेड आयोडीन युक्त नमक के रूप में—और हर घर में ‘देश का नमक’ के नाम से मशहूर—टाटा सॉल्ट की नींव एक सीधे मगर बहुत बड़े वादे पर रखी गई थी: हर परिवार तक लगातार सही मात्रा में आयोडीन पहुँचाना। वैक्यूम इवेपोरेशन तकनीक से तैयार होने के कारण, जो इसकी सभी अशुद्धियों को पूरी तरह दूर कर देती है, यह रोज़ाना के खाने के लिए एक बारीक, आसानी से बहने वाला (फ्री-फ्लोइंग) और पूरी तरह से साफ-सुथरा नमक प्रदान करता है।

By Business Bureau