कोटक महिंद्रा बैंक का कहना है कि भारत में अब गोल्ड लोन की छवि बदल रही है। पहले जहाँ इसे मजबूरी में लिया जाने वाला “आखिरी रास्ता” माना जाता था और इससे एक सामाजिक संकोच जुड़ा था, अब यह एक सोची-समझी योजना का हिस्सा बनता जा रहा है। बैंक के मुताबिक, लोग अब घर में रखे पुश्तैनी गहनों का इस्तेमाल करके मॉर्टगेज (संपत्ति पर ऋण) या बिना गारंटी वाले लोन (अनसिक्योर्ड लोन्स) के मुकाबले ज़्यादा आसानी से, तेज़ी से और कम ब्याज पर पैसा ले रहे हैं।
कोटक महिंद्रा बैंक के प्रेसिडेंट और हेड – गोल्ड लोन्स, श्रीपद जाधव ने कहा, “यह लोगों के व्यवहार में आया एक साफ़ बदलाव है। गोल्ड लोन अब केवल संकट या परेशानी से जुड़ा नहीं रहा है। स्थिर आय और संपत्तियों वाले ग्राहक अब अपनी गोल्ड ज्वेलरी को अस्थायी रूप से गिरवी रखकर फंड्स का उपयोग कर रहे हैं, ताकि वे समय के लिहाज से महत्वपूर्ण अवसरों का फायदा उठा सकें। यह छोटी अवधि की जरूरतों को पूरा करने का एक अनुशासित तरीका है।” सोने की कीमतों में आई तेज़ उछाल के कारण घरों में रखी ज्वेलरी की वैल्यू काफी बढ़ गई है। इससे परिवारों को अपनी छोटी और मध्यम अवधि की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने और सामने आने वाले नए अवसरों का लाभ उठाने में मदद मिल रही है।
जाधव ने आगे कहा, “यह व्यवहार रिटेल उधारकर्ताओं में बढ़ते ‘कन्वीनियंस-क्रेडिट’ (सुविधाजनक ऋण) के ट्रेंड को दर्शाता है, क्योंकि गोल्ड लोन के लिए बहुत ही कम कागज़ी कार्रवाई की ज़रूरत होती है।”
