पश्चिम बंगाल के सुंदरबन क्षेत्र के रायदिघी में गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत के कारण समुद्री मछुआरों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। सिलेंडर उपलब्ध न होने की वजह से कई ट्रॉलर गहरे समुद्र में मछली पकड़ने नहीं जा पा रहे हैं। इस स्थिति ने ट्रॉलर मालिकों और मछुआरों पर भारी आर्थिक दबाव डाल दिया है।आमतौर पर ट्रॉलरों पर खाना पकाने के लिए लकड़ी का इस्तेमाल नहीं किया जाता है; सुरक्षा और सुविधा की दृष्टि से मछुआरे गैस सिलेंडरों पर ही निर्भर रहते हैं। एक ट्रॉलर में लगभग 15 से अधिक मछुआरे होते हैं और उन्हें समुद्र में एक सप्ताह से लेकर 15 दिनों तक रहना पड़ता है।
इस लंबी अवधि के दौरान भोजन तैयार करने के लिए गैस सिलेंडर एक अनिवार्य आवश्यकता है।ट्रॉलर मालिकों ने बताया कि सिलेंडर न मिलने के कारण वे मछुआरों को समुद्र में नहीं भेज पा रहे हैं। ऐसे में मछुआरों को काम पर बिठाकर खिलाना पड़ रहा है और उन्हें प्रतिदिन 700 से 800 रुपये की मजदूरी भी देनी पड़ रही है। इससे मालिकों को दोहरा आर्थिक नुकसान हो रहा है। मछुआरे बाप्पा सरदार ने बताया कि वे विभिन्न जगहों पर गैस सिलेंडरों की तलाश कर रहे हैं, लेकिन कहीं भी स्टॉक उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने कहा कि ‘बैन पीरियड’ (मछली पकड़ने पर रोक की अवधि) शुरू होने से पहले अभी दो ट्रिप बाकी हैं, जिसका मतलब है कि लगभग एक महीने तक और मछली पकड़ी जा सकती है। समुद्र में जाने की तैयारियों के बीच अचानक पैदा हुए इस गैस संकट ने मछुआरों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। उन्हें डर है कि यदि जल्द ही आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो वे सीजन की अंतिम कमाई से भी हाथ धो बैठेंगे।
