आखिर क्यों उधार ले रहे हैं स्मार्ट अर्नर्स, भले ही उन्हें इसकी ज़रूरत नहीं है

भारत में पर्सनल लोन को लेकर सोच अब बदल रही है। पहले इन्हें सिर्फ़ मुश्किल या इमरजेंसी के समय से जोड़ा जाता था, लेकिन आज एक नया और ज्यादा समझदार उधारकर्ता वर्ग सामने आ रहा है। यह बदलाव खासतौर पर उन लोगों में दिख रहा है जिनकी आय स्थिर है, नियमित सैलरी आती है और जो वर्षों से अनुशासन के साथ बचत और निवेश करते आ रहे हैं।

कोविड के बाद जो सबसे बड़ा बदलाव आया, वह उनकी निवेश करने की क्षमता में नहीं, बल्कि “निवेश” की उनकी परिभाषा में था। कई लोगों को यह एहसास हुआ कि वे अपने भविष्य के लिए तो सही फैसले ले रहे थे, लेकिन अनजाने में उन्होंने अपनी सेहत, मानसिक शांति और जीवन की गुणवत्ता में निवेश को टाल दिया था। तेज़ रफ्तार कामकाजी जीवन और बढ़ते तनाव के बीच अब वेलनेस, सेल्फ-केयर और बेहतर जीवनशैली को लग्ज़री नहीं, बल्कि ज़रूरत के तौर पर देखा जाने लगा है।

इस सोच के साथ आज के उधारकर्ता ज़्यादा स्पष्टता और उद्देश्य के साथ खर्च कर रहे हैं। वे लंबे समय से टले हुए लक्ष्यों—जैसे वेलनेस, शिक्षा, जीवन के खास अनुभव, घर से जुड़ी सुविधाएं और व्यक्तिगत आकांक्षाएं—को प्राथमिकता दे रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि वे इन जरूरतों के लिए अपनी मेहनत से बनाए गए लंबे समय के निवेश को तोड़ना नहीं चाहते। वे ईएमआई चुकाने में सक्षम हैं और चाहते हैं कि उनकी SIP, निवेश पोर्टफोलियो और रिटायरमेंट प्लान बिना रुकावट आगे बढ़ते रहें।

यहीं पर्सनल लोन एक व्यावहारिक समाधान बनकर उभरता है। तय और अनुमानित ईएमआई से आज की ज़रूरतें पूरी होती हैं, जबकि लंबी अवधि का निवेश अनुशासन बना रहता है। इस तरह पर्सनल लोन को लेकर “सपने पूरे करने के लिए लिया गया कर्ज़” वाली पुरानी सोच बदल रही है। आज के कई उधारकर्ता पहले से ही निवेशक हैं—वे अपनी संपत्ति बनाने की यात्रा को रोके बिना, अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए क्रेडिट का समझदारी से इस्तेमाल कर रहे हैं।

इस ट्रेंड के पीछे एक व्यावहारिक और जिम्मेदारी भरी सोच है। कई ग्राहक नहीं चाहते कि छोटी-मोटी जरूरतों के लिए अपनी लंबी अवधि की बचत या निवेश को भुनाएं, क्योंकि इससे कंपाउंडिंग रुक सकती है, भविष्य के रिटर्न कम हो सकते हैं और कभी-कभी टैक्स का असर भी पड़ता है। इसके बजाय, एक तय ईएमआई उन्हें तुरंत जरूरत पूरी करने की सुविधा देती है, जबकि एसआईपी, शेयर होल्डिंग और रिटायरमेंट प्लान बिना बाधा चलते रहते हैं।

शहरों में यह मानसिकता अलग-अलग जरूरतों के रूप में सामने आ रही है। कहीं यह सेहत और तंदुरूस्‍ती से जुड़ी है, कहीं जीवन के अहम पड़ावों से, और अब तेजी से उन एसेट्स को बनाने से भी, जिन्हें लोग लंबे समय से चाहते थे। ग्राहक पर्सनल लोन का इस्तेमाल तब कर रहे हैं जब समय सबसे ज्यादा मायने रखता है—और साथ ही अपनी लंबी अवधि की वित्तीय योजना को सुरक्षित भी रख रहे हैं।

By Business Bureau