बैंकिंग प्रणाली में ऋण-जमा अनुपात (एलडीआर) दिसंबर दो हज़ार पच्चीस की तिमाही में इक्यासी दशमलव छह प्रतिशत के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है, जो बैंकों के लिए बड़ी चिंता का विषय है। इसका मुख्य कारण यह है कि कर्ज की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है, लेकिन बैंक उस गति से नई जमा राशि नहीं जुटा पा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, एचडीएफसी बैंक में ऋण वृद्धि ग्यारह दशमलव नौ प्रतिशत रही, जबकि जमा वृद्धि केवल ग्यारह दशमलव पांच प्रतिशत दर्ज की गई। इसी तरह बैंक ऑफ बड़ौदा और अन्य सरकारी व निजी बैंकों में भी कर्ज की रफ़्तार जमा राशि के मुकाबले काफी अधिक बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कर्ज और जमा के बीच का यह अंतर इसी तरह बना रहा, तो बैंकों को नई जमा राशि आकर्षित करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। ऋण-जमा अनुपात का बढ़ना यह दर्शाता है कि बैंक अपनी उपलब्ध जमा पूंजी का एक बहुत बड़ा हिस्सा कर्ज के रूप में दे रहे हैं, जिससे भविष्य में नकदी की कमी होने का खतरा है। आने वाले समय में, बैंकों को अपने लाभ के अंतर को सुरक्षित रखने और भारतीय रिजर्व बैंक के मानकों को पूरा करने के लिए नई जमा राशि जुटाने के कड़े और प्रभावी प्रयास करने होंगे।
