असम में १२६ सदस्यीय विधानसभा के लिए होने वाले आगामी २०२६ के चुनावों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में, पार्टी अपने सुशासन, मजबूत संगठनात्मक ढांचे, विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और विद्रोही गुटों के साथ हुए शांति समझौतों को अपनी प्रमुख उपलब्धियों के रूप में पेश कर रही है। केंद्र और राज्य की ‘डबल-इंजन’ सरकार के विकास कार्यों और शीर्ष नेताओं के लगातार दौरों से पार्टी अपने चुनाव प्रचार को और धार दे रही है। इसके अलावा, विपक्ष के बिखराव का सीधा फायदा भी भाजपा को मिलने की उम्मीद है, जिससे उनके जीतने की संभावनाओं को बल मिल सकता है।
हालांकि, सत्ता में लगातार २ कार्यकालों यानी १० वर्षों तक रहने के कारण भाजपा को सत्ता-विरोधी लहर (एंटी-इंकंबेंसी) जैसी गंभीर चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष ने बेरोजगारी, कथित भ्रष्टाचार और अल्पसंख्यक समुदाय की चिंताओं को प्रमुख चुनावी मुद्दे बनाने का प्रयास किया है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर कुछ विधायकों के प्रति जनता की नाराजगी और टिकट वितरण के दौरान पार्टी के भीतर संभावित आंतरिक कलह भी भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं। इन तमाम चुनौतियों के बीच, पार्टी का मुख्य फोकस अपनी जमीनी पकड़ मजबूत बनाए रखने और महिला, युवा व कमजोर वर्गों को आकर्षित करने वाली अपनी कल्याणकारी नीतियों पर टिका हुआ है।
