एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (एएससीआई-ASCI) की ट्रेनिंग शाखा एएससीआई एकेडमी ने ‘एथिकल UI/UX डिज़ाइन्स: बिल्डिंग कंज्यूमर ट्रस्ट’ नामक एक ई-लर्निंग कोर्स लॉन्च किया है। यह कोर्स डिजिटल मार्केटर्स, ई-कॉमर्स कंपनियों, प्रोडक्ट प्रोफेशनल्स और डिज़ाइनर्स के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह कोर्स हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के सहयोग से शुरू किया गया है। यह कोर्स ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण है जब सरकार डार्क पैटर्न्स जैसे अनैतिक व्यवहारों पर नकेल कस रही है और अनुपालन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। यह कोर्स यूजर इंटरफ़ेस डिज़ाइन की मदद से उपभोक्ता व्यवहार पर प्रभाव को गहराई से समझाता है और डिजिटल अनुभवों में नैतिक मानकों, पारदर्शिता तथा भरोसे को बढ़ावा देता है जो नियामकीय ढांचों और एएससीआई संहिता के अनुरूप है।
डार्क पैटर्न्स पर वैश्विक और घरेलू नियामक जांच के बीच, लोकलसर्कल्स के एक स्वतंत्र सर्वेक्षण में पाया गया कि 26 प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने दावा किया था कि उनकी सेवाएं डार्क पैटर्न्स से मुक्त हैं, लेकिन उनमें से 21 अभी भी एक या अधिक निषिद्ध धोखाधड़ी डिज़ाइन तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे थे, जैसे चेकआउट पर छिपी फीस (ड्रिप प्राइसिंग), जबरन एक्शन प्रॉम्प्ट्स और बास्केट स्नीकिंग। यह सब सेल्फ-सर्टिफिकेशन के बाद भी हो रहा था, जो डार्क पैटर्न्स और उनके नैतिक विकल्पों की बेहतर और अधिक सूक्ष्म समझ की आवश्यकता पर जोर देता है। लोकलसर्कल्स एक कम्युनिटी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है जो नागरिकों को सरकार से जोड़ता है। एएससीआई का यह 40 मिनट का ई-लर्निंग कोर्स तीन मॉड्यूल्स में विभाजित है। पहला मॉड्यूल UI और UX का परिचय देता है और बताता है कि डिज़ाइन के विकल्प यूजर के फैसलों को कैसे प्रभावित करते हैं। दूसरा मॉड्यूल धोखाधड़ी डिज़ाइन पैटर्न्स को डीकोड करता है। अंतिम मॉड्यूल डार्क पैटर्न्स के कंज्यूमर ट्रस्ट पर प्रभाव की जांच करता है और नैतिक विकल्प पेश करता है, जिससे अनुपालन करने वाला दृष्टिकोण अपनाया जा सके।
एएससीआई की सीईओ और सेक्रेटरी जनरल, मनीषा कपूर ने कहा, “भारतीय विज्ञापन के नैतिक मार्गदर्शक के रूप में एएससीआई अनुपालन प्रशिक्षण को अपनी प्राथमिकताओं में शीर्ष स्थान देता है। अब तक हम नियामक प्राधिकरणों के साथ मिलकर उपभोक्ताओं और इंडस्ट्री—दोनों को डार्क पैटर्न्स के प्रति संवेदनशील और जागरूक बनाते रहे हैं। इस कोर्स के माध्यम से हम अब उस सोच को ठोस अमल में बदल रहे हैं। हमारा दृढ़ विश्वास है कि विज्ञापनकर्ता नैतिक और नियमों के अनुरूप यूज़र इंटरफेस को न केवल अपना सकते हैं, बल्कि उन्हें अपने ब्रांड के पक्ष में प्रभावी रूप से उपयोग भी कर सकते हैं—और यही इस कोर्स का मूल उद्देश्य है। यह पहल ऐसे समय में उपभोक्ता विश्वास को सुदृढ़ करने और दीर्घकालिक ब्रांड विश्वसनीयता को मजबूत करने में उद्योग का मार्गदर्शन करेगी।”
