डॉ. पिनाकी सुंदर कर, कंसल्टेंट – गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट एवं हेपेटोलॉजिस्ट, मणिपाल हॉस्पिटल सिलीगुड़ी
एसिडिटी को समझना
एसिडिटी एक सामान्य पाचन संबंधी समस्या है, जो पेट में अम्ल के अत्यधिक उत्पादन के कारण होती है। यह अक्सर जीवनशैली और खान-पान की आदतों से जुड़ी होती है, जैसे अधिक मसालेदार या तैलीय भोजन, अनियमित भोजन समय, तनाव, नींद की कमी, तथा चाय या कॉफी का अत्यधिक सेवन। इसके लक्षणों में छाती या ऊपरी पेट में हल्की जलन, पेट फूलना या असहजता शामिल है। ये लक्षण सामान्यतः कभी-कभार होते हैं और जीवनशैली में बदलाव या बिना डॉक्टर की पर्ची वाली एंटासिड दवाओं से नियंत्रित किए जा सकते हैं।
एसिड रिफ्लक्स क्यों होता है
एसिड रिफ्लक्स तब होता है जब पेट का अम्ल वापस भोजन नली (इसोफेगस) में आ जाता है। यह आमतौर पर निचले इसोफेजियल स्फिंक्टर नामक मांसपेशी के कमजोर या सही से कार्य न करने के कारण होता है, जो सामान्यतः भोजन और अम्ल को ऊपर लौटने से रोकती है। अम्ल का यह उल्टा प्रवाह भोजन नली की परत को उत्तेजित करता है, जिससे सीने में जलन, मुंह में खट्टा या कड़वा स्वाद, भोजन का वापस आना और विशेष रूप से भोजन के बाद या लेटने पर बढ़ने वाली असहजता जैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं। कभी-कभार रिफ्लक्स सामान्य है, लेकिन यदि यह बार-बार हो, तो यह किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
जब रिफ्लक्स बन जाता है जीईआरडी (GERD)
गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स रोग (जीईआरडी – GERD) एक दीर्घकालिक स्थिति है, जिसमें एसिड रिफ्लक्स बार-बार और लगातार होता है तथा दैनिक गतिविधियों और नींद को प्रभावित करता है। जीईआरडी से पीड़ित व्यक्ति को बार-बार सीने में जलन, निगलने में कठिनाई, छाती में दर्द, लगातार खांसी, आवाज में भारीपन तथा लगातार एसिडिटी की अनुभूति हो सकती है। ये लक्षण कभी-कभी हृदय संबंधी समस्याओं से मिलते-जुलते होते हैं, जिससे निदान में देरी हो सकती है।
जीईआरडी (GERD) को नजरअंदाज क्यों नहीं करना चाहिए
यदि जीईआरडी का उपचार न किया जाए, तो समय के साथ गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। भोजन नली का पेट के अम्ल के लगातार संपर्क में रहना सूजन, घाव (अल्सर) और भोजन नली के संकुचन का कारण बन सकता है, जिससे निगलना दर्दनाक हो जाता है। कुछ मामलों में लंबे समय तक रहने वाला जीईआरडी बैरेट्स इसोफेगस नामक स्थिति में बदल सकता है, जो भोजन नली के कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है। इसलिए समय पर निदान और उचित उपचार अत्यंत आवश्यक है।
कब चिकित्सा सलाह लें
यदि सीने में जलन सप्ताह में २ से अधिक बार हो, दवा लेने के बावजूद बनी रहे, या निगलते समय दर्द, बिना कारण वजन कम होना, लगातार खांसी, सांस में सीटी जैसी आवाज या छाती में दर्द जैसे लक्षण साथ हों, तो डॉक्टर से परामर्श आवश्यक है। ये संकेत जीईआरडी या अन्य जठरांत्र संबंधी विकारों की ओर इशारा कर सकते हैं, जिनके लिए आगे जांच और उपचार की आवश्यकता होती है।
निदान और उपचार के विकल्प
निदान सामान्यतः लक्षणों के आधार पर किया जाता है, लेकिन कुछ मामलों में डॉक्टर एंडोस्कोपी या भोजन नली में अम्ल के स्तर को मापने के लिए विशेष जांच की सलाह दे सकते हैं। उपचार में आमतौर पर अम्ल के उत्पादन को कम करने वाली दवाएं तथा जीवनशैली और आहार में बदलाव शामिल होते हैं, ताकि लक्षणों को नियंत्रित किया जा सके और उनकी पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
लक्षणों को नियंत्रित करने में सहायक जीवनशैली बदलाव
सरल जीवनशैली में परिवर्तन एसिडिटी और रिफ्लक्स को काफी हद तक कम कर सकते हैं। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार भोजन करना, देर रात खाने से बचना, मसालेदार और तले हुए भोजन को सीमित करना, स्वस्थ वजन बनाए रखना और धूम्रपान छोड़ना अत्यंत प्रभावी उपाय हैं। सोते समय सिर को थोड़ा ऊंचा रखना और भोजन के तुरंत बाद न लेटना भी एसिड रिफ्लक्स को रोकने में मदद करता है।
निष्कर्ष
कभी-कभार होने वाली एसिडिटी सामान्य और आमतौर पर हानिरहित होती है, लेकिन बार-बार होने वाली सीने की जलन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार लक्षण एसिड रिफ्लक्स या जीईआरडी (GERD) की ओर संकेत कर सकते हैं, जिनके लिए चिकित्सकीय ध्यान आवश्यक है। समय पर हस्तक्षेप जटिलताओं को रोक सकता है और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने में सहायक होता है।
